अपनी यात्रा का आनंद इन शायरी के साथ बढ़ाओ
कुमार-विश्वास (मुक्तक) : मै जब भी तेज़ चलता हूँ नज़ारे छूट जाते हैं
मै जब भी तेज़ चलता हूँ नज़ारे छूट जाते हैं
कोई जब रूप गढ़ता हूँ तो साँचे टूट जाते हैं
मै रोता हूँ तो आकर लोग कंधा थपथपाते हैं
मैं हँसता हूँ तो अक्सर लोग मुझसे रूठ जाते हैं___________कुमार-विश्वास (मुक्तक)
कुमार-विश्वास (मुक्तक) : बहुत बिखरा बहुत टूटा थपेड़े सह नही पाया
बहुत बिखरा बहुत टूटा थपेड़े सह नही पाया
हवाओं के इशारों पर मगर मै बह नही पाया
अधूरा अनसुना ही रह गया यूँ प्यार का क़िस्सा
कभी तुम सुन नही पाई कभी मै कह नही पाया___________कुमार-विश्वास (मुक्तक)
अहमद फ़राज़ : किसी को घर से निकलते ही मिल गई मंज़िल
किसी को घर से निकलते ही मिल गई मंज़िल
कोई हमारी तरह उम्र भर सफ़र में रहा______________अहमद फ़राज़
वसीम बरेलवी : मुझ को चलने दो अकेला है अभी मेरा सफ़र
मुझ को चलने दो अकेला है अभी मेरा सफ़र
रास्ता रोका गया तो क़ाफ़िला हो जाऊँगा_____________वसीम बरेलवी
राहत इंदौरी : रास्ते आवाज़ देते हैं सफ़र जारी रखो
राह के पत्थर से बढ़ कर कुछ नहीं हैं मंज़िलें
रास्ते आवाज़ देते हैं सफ़र जारी रखो_________________राहत इंदौरी
अहमद फ़राज़ : कुछ और दूर ज़रा साथ चल के देखते हैं
जुदाइयाँ तो मुक़द्दर हैं फिर भी जान-ए-सफ़र
कुछ और दूर ज़रा साथ चल के देखते हैं__________अहमद फ़राज़
मुनव्वर राना : तुम मुझे ख़्वाब में आ कर न परेशान करो
अब जुदाई के सफ़र को मिरे आसान करो
तुम मुझे ख़्वाब में आ कर न परेशान करो__________मुनव्वर राना



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